प्रेस क्लब, लखनऊ में पत्रकारों को संबोधित करते हुए ईरान के कल्चरल काउन्सिल डा. करीम नजफ़ी ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध 5000 साल पूर्व से काफ़ी अच्छे रहे हैं और यही कारण है कि ईरान की संस्क्रति की झलक हमें कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। उन्होने कहा कि भारत और ईरान में काफ़ी समानताएं हैं जैसे भारत की आज़ादी के लिए महात्मा गांधी ने आवाज़ उठाई उसी प्रकार से ईरान से ज़ुल्म ख़त्म करने के लिए आयतुल्लाह ख़ुमैनी ने आवाज़ उठाकर ईरानी जनता को ज़ुल्मों से आज़ादी दिलाई। ईरान में सुन्नी समुदाय के साथ कथित दोहरे बर्ताव के सवाल पर उन्होने कहा कि पिछले वर्ष 60 उलमा का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान गया था, जिसमें अधिकांश सुन्नी उलमा थे और उन्होनें वहां अपनी आंखों से देखा कि ईरान में किसी पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हर इन्सान आज़ादी के साथ अपने धर्म का पालन करता है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि रसूल के जन्मदिन को लेकर मतभेदों को समाप्त करने के लिए ईरान में 12 रबीउल अव्वल से 17 रबीउल अव्वल तक हफ्तए वहदत मनाया जाता है।
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